ऋषिकेश। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना के निर्माण कार्य में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। परियोजना के तहत एस्केप टनल-1 का अंतिम ब्रेकथ्रू सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया। करीब 10.847 किलोमीटर लंबी इस सुरंग के दोनों छोर जुड़ने के साथ ही परियोजना ने एक और महत्वपूर्ण पड़ाव पार कर लिया है। यह परियोजना की दूसरी सबसे लंबी सुरंग है।रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) की ओर से किए जा रहे इस महत्वपूर्ण कार्य के दौरान हिमालयी क्षेत्र की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच सुरंग का निर्माण किया गया। कई स्थानों पर चट्टानों के अत्यधिक टूटे और कमजोर होने के कारण निर्माण कार्य चुनौतीपूर्ण रहा। इसके बावजूद इंजीनियरों और निर्माण कर्मियों ने लगातार काम करते हुए सुरंग को आर-पार करने में सफलता हासिल की।

11 सितंबर को हुए इस ब्रेकथ्रू के साथ ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना में अब तक 41 टनल ब्रेकथ्रू पूरे हो चुके हैं।

125 किलोमीटर लंबी इस महत्वाकांक्षी रेल परियोजना में कुल 16 मुख्य सुरंगें और 12 एस्केप सुरंगें बनाई जा रही हैं। परियोजना का बड़ा हिस्सा सुरंगों के माध्यम से तैयार किया जा रहा है।

एस्केप सुरंगों का निर्माण मुख्य रेल सुरंगों के समानांतर किया जाता है। आपात स्थिति में इनका इस्तेमाल सुरक्षित निकासी के लिए किया जा सकेगा। परियोजना के तहत कई सुरंगों का निर्माण पूरा हो चुका है और शेष कार्य को भी तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। जुलाई 2026 तक मुख्य सुरंगों में करीब 101 किलोमीटर और एस्केप सुरंगों में 95 किलोमीटर से अधिक निर्माण कार्य पूरा हो चुका था। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना की कुल लंबाई 125 किलोमीटर है। यह रेल लाइन देहरादून, टिहरी गढ़वाल, पौड़ी गढ़वाल, रुद्रप्रयाग और चमोली जिलों से होकर गुजरेगी। परियोजना के पूरा होने से गढ़वाल के पर्वतीय क्षेत्रों में रेल कनेक्टिविटी मजबूत होगी और तीर्थाटन व पर्यटन को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।

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